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CSS Use करने के Top – 5 Benefits  जानें हिंदी में|

CSS Use करने के Top – 5 Benefits जानें हिंदी में|

सीएसएस उपयोग करने के टॉप – 5 फायदे
सीएसएस उपयोग करने के फायदे
Html, Css और Javascript एक वेबसाइट और उसके वेबपेज के वो तीन सबसे महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं, जिनके बिना आज कोई भी वेबसाइट अधूरी होगी| जहाँ एचटीएमएल हमारे वेबपेज पर हमारे द्वारा लिखे एलिमेंट्स को दिखाता है, वहीँ सीएसएस उन एलिमेंट्स को कैसे और कहाँ पर दिखाना हैं ये सुनिश्चित करता हैं, और जावास्क्रिप्ट वेबसाइट और उसके यूजर के मध्य इंटरेक्शन का माध्यम बनता है| आज हम इन्ही तीनों महत्वपूर्ण स्तम्भ में से एक स्तम्भ सीएसएस के Top – 5 Benefits Of Using CSS (सीएसएस उपयोग करने के टॉप – 5 फायदों) के बारे में हमारे CSS Tutorial में जानेंगे|

Benefits Of Using CSS- वैसे सीएसएस का उपयोग हम अपने वेबपेज पर तीन तरीकों से कर सकते हैं, वो तीन तरीके जाननें के लिए यहाँ क्लिक करें अपने एचटीएमएल पेज पर सीएसएस उपयोग करने के तीन तरीके

हम यहाँ एक्सटर्नल स्टाइलशीट की मदद से सीएसएस उपयोग करने के फायदों के बारे में जानेंगे, क्योंकि एक्सटर्नल स्टाइलशीट के द्वारा सीएसएस फाइल को एचटीएमएल फाइल के साथ लिंक करना और उपयोग करना ही Best Practice माना जाता हैं....... 

1. Time Saving (समय की बचत) - हमारे वेबपेज में बहुत सारे एलिमेंट्स होते हैं, और उनमें से कई एलिमेंट्स को हम अपने वेबपेज में बार-बार रिपीट करते हैं, जैसे पैराग्राफ, इमेजेस आदि, और यदि हमें इन सभी एलिमेंट्स पर एक ही सीएसएस स्टाइल को लागू करना पड़ें, और अगर हम हर एक टैग पर अलग से स्टाइल एट्रिब्यूट के ज़रिये सीएसएस लागू करेंगे, तो इससे समय और मेहनत दोनों ज्यादा लगेंगे, इसलिए हम एक्सटर्नल CSS Stylesheet के ज़रिये एक ही बार में एक ही प्रकृति के टैग्स पर सीएसएस स्टाइल को अप्लाई कर सकते हैं जिससे वो सभी सेम टैग पर लागू हो जायेंगे, इससे कम समय में हम ज्यादा कोड कर सकते हैं|

इनलाइन स्टाइल द्वारा पैराग्राफ्स के कलर चेंज
इनलाइन सीएसएस स्टाइल 
यहाँ ऊपर आप तस्वीर में देख सकते हैं, कैसे पाँचों पैराग्राफ्स पर सेम सीएसएस स्टाइल apply करने के लिए सेम वहीँ कोड पांच बार लिखा गया हैं, जो कि बेस्ट प्रैक्टिस किसी भी सूरत में नहीं कहा जा सकता हैं| इसे इनलाइन स्टाइल कहा जाता हैं| इनलाइन स्टाइल को लागू करने के लिए आपको एक्सटर्नल स्टाइलशीट के साथ अपने एचटीएमएल वेबपेज को लिंक करने की ज़रूरत नही है|
एक्सटर्नल स्टाइलशीट की मदद से पैराग्राफ के कलर चेंज
एक्सटर्नल स्टाइलशीट सीएसएस स्टाइल
ऊपर की तस्वीर में आप देख सकते हैं कैसे एक्सटर्नल स्टाइलशीट के ज़रिये 2 लाइन के छोटे से कोड ने वहीँ काम कर दिखाया, जिसके लिए पहले इनलाइन स्टाइल के ज़रिये सेम कोड को पांच बार लिखा गया था| इनलाइन स्टाइल को लागू करने के लिए आपको एक्सटर्नल स्टाइलशीट के साथ अपने एचटीएमएल वेबपेज को लिंक करने की ज़रूरत है|

2. Less Page Size (पेज साइज़ का छोटा या कम होना)- इंटरनल और इनलाइन स्टाइल का उपयोग हमें हमारे एचटीएमएल पेज पर ही करना पड़ता है, जिससे हम स्टाइल तो लागू कर लेते हैं, लेकिन ऐसे करने पर हमारा Html Code और CSS Code दोनों ही मिक्स हो जाते हैं और समझने में कठिनाई के साथ-साथ हमारे एचटीएमएल पेज का साइज़ भी काफी बड़ा हो जाता हैं, जिससे हमारा वेबपेज लोड होने में उस वेबपेज से अधिक समय तो लेगा ही जिस वेबपेज का CSS Code अलग से एक सीएसएस फाइल में लिखा होगा| इसलिए ये अच्छा होगा अगर आप अपने एचटीएमएल और सीएसएस कोड को अलग-अलग फाइल बना कर और उन्हें साथ में लिंक करके ही उपयोग में लेवें|

3. Creative Look (रचनात्मक रूप)- सीएसएस हमारे वेबपेज को सुन्दर बनाने का काम करता हैं, सीएसएस में हमें कई ऐसे विकल्प मिल जाते हैं, जिससे हम हमारे वेबपेज को सुन्दर और मनमोहक बना सकते हैं, जैसे फॉण्ट फॅमिली का यूज़ करके हम हमारे वेबपेज पर अलग फॉण्ट का उपयोग कर सकते हैं, इसके अलावा हम हमारे वेबपेज के बैकग्राउंड पर कोई अच्छी सी इमेज या कलर भी सेट कर सकते हैं|

यहाँ तक कि हम हमारे वेबपेज पर उपयोग किये जा रहे फोंट्स की लम्बाई, मोटाई और चौड़ाई को भी हैंडल कर सकते हैं, जो कि एचटीएमएल के द्वारा सम्भव नही है, यहाँ तक कि CSS 3 में तो एनीमेशन को भी सीएसएस के द्वारा वेबपेज पर लागू किया जा सकता हैं|

सरल शब्दों में कहूँ तो सीएसएस में किसी भी तरह की कोई बंदिशे आपको नहीं मिलेंगी, बस आपको अपनी रचनात्मकता का उपयोग करना होगा, और आप सुन्दर से सुन्दर वेबपेज बना सकते हैं|

4. Effective Performence (प्रभावकारी/प्रभावशाली प्रदर्शन)- आज दुनिया में जितनी भी अच्छी और सुन्दर वेबसाइट को आप देखते हैं, वो सब सीएसएस के द्वारा ही सुसज्जित की गयी है, उनके इतना प्रभावी होने का एक ही कारण है और वो हैं CSS | बहुत कम Css Code में हम हमारे वेबपेज को अच्छा और प्रभावकारी रूप दे सकते हैं|

5. Easy To Learn And Implement (सीखनें और उपयोग करने में आसान)- एचटीएमएल के बाद अगर में कहूँ कि सीएसएस सीखने में सबसे आसान हैं, तो इसमें कुछ गलत नही होगा, सीएसएस सीखने के लिए आपको किसी भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का ज्ञान होने की आवश्यकता होने की ज़रूरत नही है, सीएसएस को आप 15 दिनों के भीटर इतना तो सीख ही सकते हैं, जहाँ आप एक वेबपेज को सुन्दर डिजाईन कर पायेंगे, और जितना अधिक आप सीखते जायेंगे आपकी सीएसएस में महारत बढती चली जायेगी|

इसके अलावा सीएसएस को उपयोग करना भी उसके सीखने जितना ही आसान है और मज़ेदार भी हैं, इसीलिए आप हमारे CSS Tutorial से जुड़ें रहें और सीखते रहें|

तो साथियों, इस तरह आपने जाना Top – 5 Benefits Of Using CSS (सीएसएस उपयोग करने के टॉप – 5 फायदों) के बारे में, अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें, या फिर आप अपने सीएसएस के ज्ञान को हमारे साथ बांटना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें, इसके अलावा अगर आपके पास कोई सवाल हो तो आप मुझसे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं|

आपका ये पोस्ट पढने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद|
Html में कितने type के Webpage होते हैं? और Responsive Web Design क्या हैं?

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रेस्पोंसिव वेब-डिजाईन और एचटीएमएल में वेबपेजस के प्रकार
लैपटॉप कंप्यूटर

Learn Html इन Hindi
– नमस्कार दोस्तों, स्वागत हैं आपका हमारी एक और नई एचटीएमएल पोस्ट में, इस पोस्ट में हम जानेंगे Types of Webpage in Html (एचटीएमएल में कितने तरह के वेबपेज होते हैं), और Responsive Web Design क्या हैं?

Types of Webpage in Html –  साथियों वेबपेज, website का एक हिस्सा होता हैं, जिसमें उस वेबसाइट से सम्बंधित जानकारी होती हैं, ऐसे ही बहुत सारे वेबपेज मिलकर एक वेबसाइट को बनाते हैं, जिस तरह एक पेज एक किताब का हिस्सा होता हैं, ठीक उसी तरह एक वेबपेज एक वेबसाइट का|

पहले के समय में वेबसाइटस को सिर्फ सीमित Html और Css के द्वारा ही डिजाईन किया जाता था, जिसमें एक बार जो जानकारी उस वेबपेज पर डाल दी जाती थी, वही हमेशा रहती थी ज्यादा कुछ उसमें परिवर्तन देखने को नहीं मिलता था|

इससे उस वेबसाइट पर आने वाले रीडर उस वेबसाइट पर ज्यादा समय तक टिक नही पाते थे, क्योंकि एक तरफ जहाँ वो वेबसाइट एकदम साधारण और ना के बराबर मनमोहक होती थी, वहीँ दूसरी और उस वेबपेज और उसके पढने वाले व्यक्ति के बीच किसी भी प्रकार का इंटरेक्शन नही हो पाता था|

अब आप खुद सोचिये अगर आपको एक ऐसा पेज मिल जाए जिस पर पढ़ी जानकारी को आप अपने साथियों के साथ शेयर करना चाहते हो लेकिन वहाँ पर शेयर करने का कोई विकल्प ही आपको ना मिले, तो आप कैसे उस जानकारी को दूसरों के साझा करेंगे|

तो इस समस्या का सुलझाने के लिए और रीडर्स ज्यादा समय तक वेबसाइट पर वक्त बिता पाए, एचटीएमएल में काफी नए परिवर्तन और विकास किये गये, और आज हम 2 तरह के एचटीएमएल वेबपेज से रु-ब-रु होते हैं, जिसमें एक हैं....
1.       Static Webpage
2.       Dynamic Webpage

1.    Static Webpage (स्टेटिक वेबपेज)-  स्टेटिक वेबपेज वो वेबपेज होते हैं, जिनमें रखे गये कंटेंट की भविष्य में ज्यादा परिवर्तन की सम्भावना नही होती हैं, या ना के बराबर होती हैं, इसके अलावा स्टेटिक वेबपेज में यूजर इंटरेक्शन नही होता है- उदाहरण के लिए आप किसी भी वेबसाइट के अबाउट मी पेज, कांटेक्ट अस पेज, प्राइवेसी पालिसी या डिस्क्लेमर पेज को देखिये, वहाँ पर आपको बहुत सारा टेक्स्ट पढने को मिलेगा, जिसमें उस संस्था से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी होगी|

इन पेजस पर यूजर इंटरेक्शन बिलकुल नही होगा, इसके अलावा उन सूचनाओं में परिवर्तन आपको  बहुत कम देखने को मिलेगा| स्टेटिक वेबपेजस को थोडा मनमोहक बनाने के लिए उनमें भी इमेजस का उपयोग किया जाता रहा है|

स्टेटिक वेबपेज को कोई भी व्यक्ति ओपन करे कंटेंट वही रहता है, उसमें कोई भी परिवर्तन नही होता हैं| इसके अलावा स्टेटिक वेबपेज में दिखने वाले कंटेंट की एक सीमा होती है, जो आखिर तक स्क्रॉल करने के बाद खत्म हो जाती हैं|

2.    Dynamic Webpage- डायनामिक वेबपेज वो वेबपेज होते हैं, जिनमें वेबपेज का कंटेंट यूजर के इनपुट पर निर्भर करता हैं, उदाहरण के लिए आप फेसबुक पर लॉग इन करते हैं, आप अपना ईमेल और पासवर्ड डालते हैं, और आपकी फेसबुक आईडी खुलकर सामने आ जाती हैं, जिसमें आपकी आईडी से सम्बन्धित सामग्री खुलकर सामने आती हैं, लेकिन जब कोई दूसरा व्यक्ति अपनी फेसबुक आईडी पर लॉग इन करता हैं, तब उसके पास उसकी आईडी से सम्बंधित सामग्री खुलकर सामने आती हैं, आपकी आईडी की नही|

ऐसा क्यों होता हैं? – क्या फेसबुक ने आपके लिए और बाकी सभी के लिए अलग-अलग वेबपेज बनाये हैं?

ऐसा इसीलिए होता हैं क्योंकि जब आप अपनी लॉग इन डिटेल्स एंटर करके साइन इन बटन पर क्लिक करते हैं, तब आपका ब्राउज़र फेसबुक के सर्वर के पास जाकर आपकी लॉग इन डिटेल्स को देकर आपको प्रदर्शित की जाने वाली सामग्री की मांग करता हैं, फिर एफबी का सर्वर आपकी डिटेल्स को ढ़ूंढ़कर आपके वेब ब्राउज़र को दे देता हैं, और वेब ब्राउज़र आपकी उन डिटेल्स को एक वेबपेज के रूप में आपको दिखा देता हैं|

इस तरह ना कोई व्यक्ति किसी और व्यक्ति के डाटा को एक्सेस कर पाता है, और सही व्यक्ति को सही सामग्री भी मिल जाती है, इसे ही डायनामिक वेबपेज कहते हैं| यहाँ आप यूजर इंटरेक्शन देख सकते हैं कि किस तरह एक यूजर अपने आईडी पासवर्ड की मदद से अपने फेसबुक आईडी को एक्सेस कर पा रहा होता हैं|

डायनामिक वेबपेजस की और एक खासियत होती है, के इनमें दिखने वाला कंटेंट समय के साथ बदलता रहता है, उदहारण के लिए आप जब अपनी फेसबुक आईडी को रिफ्रेश करते हैं, तब उसमें दिखने वाला कंटेंट बदल जाता है, और आप उसको जितना स्क्रॉल करेंगे वो स्क्रॉल होता जाएगा और आप ज्यादा से ज्यादा कंटेंट देख पायेंगे, ठीक इसी तरह किसी भी न्यूज़ वेबसाइट को आप देखे, उसमें दिखने वाला कंटेंट आर्टिकल, वीडियोस समय के साथ बदलते रहते हैं, उनमें कभी भी एक जैसा कंटेंट आपको देखने को नही मिलेगा, इन वेबपेज के आर्टिकल को आप शेयर कर सकते हैं क्योंकि इनमें यूजर इंटरेक्शन होगा जो स्टेटिक वेबपेज पर आपको देखने को नही मिलता|

आशा करता हूँ, आपको Static Webpage और Dynamic Webpage का अर्थ अच्छे से समझ में आ गया होगा|
  What is Responsive Web Design (रेस्पोंसिव वेब डिजाईन क्या हैं)
 दोस्तों, पहले के समय में जब इन्टरनेट और टेक्नोलॉजी का इतना विकास नही हुआ था, तब   वेबसाइट को मुख्यतः कंप्यूटरस और उससे बड़े उपकरणों के लिए ही बनाया जाता था, लेकिन फिर जैसे धीरे-धीरे इन्टरनेट घर-घर तक पहुँचने लगा और, अगर लोगों के पास कंप्यूटर ना भी होते थे, लेकिन मोबाइल सभी के पास आ गया था, और तेज़ी से फैल भी रहा था जिससे ज्यादा से जादा मोबाइल फ़ोन जनमानस के पास आने लगे, लेकिन जो वेबसाइट को कंप्यूटर के लिए बनाई जाती थी, वो वेबसाइट मोबाइल में बेढंगी खुलती थी, ऊपर और नीचे दोनों तरफ यूजर को स्क्रोलर की सहायता से वेबसाइट को देखना पड़ता था, जो User Experience के दृष्टिकोण से गलत था, User को काफी परेशानी उठानी पड़ रही थी, और इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव ये था कि कोई भी यूजर इन वेबसाइट पर ठहरना पसंद नही करता था|

इस समस्या के निदान के लिए Responsive Web Design को लाया गया| Responsive Web Design का मतलब होता हैं, अलग-अलग उपकरणों के अनुरूप वेबसाइट का ढल जाना, या अलग-अलग स्क्रीन साइज़ के अनुरूप वेबसाइट का आकर ले लेना, जिससे उस वेबसाइट को सभी उपकरणों जैसे मोबाइल फोन, टेबलेट, लैपटॉप, कंप्यूटर इत्यादि डिवाइसेस पर आसानी से देखा जा सके|

एक Web Developer होने के नाते आपका ये कर्तव्य बनता है कि आप अपने यूजर का ख्याल रखे, और इस बात को समझे कि हर व्यक्ति केवल कंप्यूटर, लैपटॉप पर ही वेबसाइट को एक्सेस नही करता हैं, और आज सबसे ज्यादा वेबसाइट को मोबाइल फ़ोन पर देखा जाता हैं, इसीलिए सबसे पहले आप छोटे-छोटे उपकरणों जैसे मोबाइल इत्यादि के लिए Website Design करें, और फिर बड़े उपकरणों जैसे कि लैपटॉप कंप्यूटर की तरफ बढ़े|

Responsive Web Design के बारे में हम आगे के आर्टिकल्स में विस्तार से जानेंगे|

तो साथियों आज इस आर्टिकल में हमने जाना कि Types of Webpage in Html (एचटीएमएल में कितने तरह के वेबपेज होते हैं), Responsive Web Design क्या हैं? 

मुझे आशा है आपको हमारा ये पोस्ट पसंद आया होगा, अगर पसंद आया हो तो आप अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें, और अगर आपके कोई प्रशन हो तो कमेंट बॉक्स में ज़रूर पूछें, इस पोस्ट को पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|
Css क्या हैं? Web Developer बनने के लिए Css सीखना क्यों ज़रूरी हैं?

Css क्या हैं? Web Developer बनने के लिए Css सीखना क्यों ज़रूरी हैं?

कंप्यूटर और उससे सम्बंधित सामान
कंप्यूटर डेस्क और एक्सेसरीज

Learn CSS इन Hindi- नमस्कार दोस्तोंस्वागत हैं आपका हमारे CSS हिंदी Tutorial में इस पोस्ट में हम जानेंगे CSS के बारे में इसके अलावा What is CSS(सीएसस क्या हैं)एक Web-Developer  बनने के लिए आपको CSS सीखना क्यों ज़रूरी हैंवर्तमान में CSS के कौनसे संस्करण का उपयोग किया जा रहा हैंऔर How to Link CSS File To Html (एक एचटीएमएल फाइल को सीएसएस से लिंक कैसे करते हैं)


What Is CSS- (सीएसएस क्या हैं)

दोस्तों, सीएसएस का पूरा नाम Cascading Style Sheets हैं, ये एक मार्कअप लैंग्वेज हैं Html की तरह, जिसका उपयोग हम हमारे वेबपेज को अच्छे से डिजाईन करने के लिए करते हैं, सीएसस के ज़रिये हम एचटीएमएल के टैग्स या एलेमेंट्स को अपने मन-मुताबिक स्टाइलिंग देते हैं, जिससे वेबपेज सुंदर दिखता हैं|

दोस्तों Html का काम वेबपेज के कंटेंट को दिखाना होता हैं, के हमारे वेबपेज में पैराग्राफ दिखेगा, इमेज दिखेगी, विडियो दिखेगी, लेकिन CSS का काम Html कंटेंट को कैसे दिखाना है और कहाँ पर दिखाना हैं होता हैं मसलन जो पैराग्राफ एचटीएमएल के ज़रिये डाला गया है, उसका फॉण्ट-साइज़ क्या होगा, फॉण्ट-फॉण्ट-फॅमिली क्या होगी, इसके अलावा विडियो फ्रेम की लम्बाई क्या होगी, चौड़ाई क्या होगी, वेबसाइट में किस रंग के फॉण्ट का यूज़ किया जाएगा, ये हम CSS की सहायता से सुनिश्चित करते हैं|

आपको Web-Developer बनने के लिए CSS सीखने की क्या ज़रूरत हैं?

दोस्तों, आज दुनिया की हर वेबसाइट मालिक की एक-दूसरे से इस बात की होड़ हैं, कि उनकी वेबसाइट बाकी सभी वेबसाइट से सबसे अच्छी हैं, एक अच्छी वेबसाइट होने से मतलब हैं जिसका यूजर इंटरफ़ेस बहुत अच्छा, सुन्दर और समझने में आसान हो, तभी कोई विजिटर उनकी वेबसाइट पर आएगा|

हम सिर्फ Html का उपयोग करके भी वेबसाइट बना सकते हैं, लेकिन वो वेबसाइट एक सफ़ेद कोरे कागज़ की तरह होगी, और कोई भी उस वेबसाइट पर जाना पसंद नही करेगा| अब आप खुद सोचकर देखो क्या आप एक ऐसी वेबसाइट पर जाना पसंद करोगे, जिसका ना कोई रंग और ना ही रूप बस कंटेंट को डाल दिया गया हैं|

मुझे आपका जवाब पहले से पता हैं, और वो हैं नहींइसलिए सभी कंपनिया और हर एक व्यक्ति अपनी वेबसाइट को सुन्दर और व्यवस्थित दिखाने के लिए एक ऐसे Web-Developer को ढूँढगे, जिसे CSS का अच्छा ख़ासा ज्ञान हो|

इसलिए आपको भी CSS सीखने की ज़रूरत हैं, ताकि आप भी Website Content को सुन्दर और अपने मन-मुताबिक दिखा सको|

How To CSS File To Html File (एक सीएसएस फाइल को एचटीएमएल फाइल के साथ लिंक कैसे करते हैं)

दोस्तों, हम तीन तरीकों से हमारी Html File में CSS Styles को apply कर सकते हैं, और वो तरीके हैं:
  • 1.    Internal Style
  • 2.    Inline Style
  • 3.    External Stylesheet
इस पोस्ट में हम एक्सटर्नल स्टाइलशीट को हमारी Html File से लिंक करना सीखेंगे|

एक्सटर्नल स्टाइलशीट- एक्सटर्नल स्टाइलशीट एक अलग CSS फाइल होती हैं, जिसे हम एक Link Tag की मदद से हमारे Html File में जोड़ते हैं| एक्सटर्नल स्टाइलशीट में हम सिर्फ CSS का कोड लिखते हैं, लेकिन फाइल का एक्सटेंशन .css ही होना चाहिए|

आप अपनी सीएसएस और एचटीएमएल फाइल का नाम कुछ भी रखो, लेकिन ध्यान रहे एचटीएमएल फाइल का एक्सटेंशन .html और सीएसएस फाइल का एक्सटेंशन .css होना ही चाहिए, गलत एक्सटेंशन या एक्सटेंशन गलत लिखने की स्थिति में आपकी एचटीएमएल और सीएसएस फाइल ठीक से काम नहीं कर पायेंगे|

एचटीएमएल फाइल को css फाइल के साथ लिंक करना-
1. एचटीएमएल फाइल को सीएसएस फाइल से लिंक करने के लिए आपको सबसे पहले अपना टेक्स्ट कोड एडिटर को ओपन करना पड़ेगा|
2.  फिर आपको 2 नई फाइल बनानी पड़ेगी, जिसमें एक फाइल का एक्सटेंशन .html और एक  फाइल का एक्सटेंशन .css होगा|

एचटीएमएल और सीएसएस फाइल एक्सटेंशन के साथ
एचटीएमएल और सीएसस फाइल्स
3.  फिर आपको हेड tag के अन्दर एक link tag बनाना पड़ेगा, और उसके अन्दर आपको 3  एट्रिब्यूट लिखने होंगे, जो होंगे:
4.   rel attribute (b.) type attribute (c.) href attribute
   
लिंक टैग से एचटीएमएल फाइल को सीएसएस फाइल के साथ लिंक करना
लिंक टैग के ऐट्रिब्यूट्स और उनकी वैल्यू 

5.  rel attribute – rel attribute में आपको stylesheet वैल्यू को डबल कोट्स में लिखना होता हैं, rel attribute आपके करंट डॉक्यूमेंट (एचटीएमएल फाइल) और आपके लिंक किये जाने वाले डॉक्यूमेंट (सीएसस फाइल) के बीच के सम्बन्ध (रिलेशनशिप) को बताता हैं|

6.  type attribute – type attribute में आपको text/css वैल्यू को डबल कोट्स में लिखना होता हैं, type attribute आपकी सीएसस फाइल का type डिफाइन करता हैं, जो कि सीएसस फॉर्मेट या कोड में होगा|

7.  सरल शब्दों में कहूँ तो type attribute आपकी सीएसस फाइल में लिखे जाने वाले टेक्स्ट या कोड को सीएसस की कोडिंग के रूप में दिखाएगा|

8.  href attribute – href attribute आपकी सीएसस फाइल को आपकी एचटीएमएल फाइल से लिंक करने का काम करेगा, आपको href attribute के अन्दर डबल कोट्स में आपकी सीएसस फाइल का लोकेशन या आपने अपनी सीएसस फाइल को जिस जगह पर सेव करके रखा हुआ हैं, वो लिखना पड़ेगा|

9.  अगर आपने अपनी सीएसस फाइल को उसी फोल्डर में सेव करके रखा हैं, जहाँ पर आपकी एचटीएमएल फाइल भी सेव हैं तो आपको अपनी css फाइल का पूरा एड्रेस नही देना पड़ेगा, लेकिन अगर आपने अपनी सीएसस फाइल को अपनी एचटीएमएल फाइल से अलग किसी अलग फोल्डर में रखा हैं, तो आपको फिर अपनी सीएसस फाइल का पूरा एड्रेस href attribute के डबल कोट्स में लिखना पड़ेगा|

10. एक बार rel, type और href attribute में वैल्यूस को लिखने के बाद आपको चेक कर लेना चाहिए, कि आपकी सीएसस फाइल आपके एचटीएमएल फाइल से लिंक हुई हैं या नहीं|

11.  यहाँ मैंने सीएसस फाइल में बॉडी tag को बैकग्राउंड कलर देने की कोडिंग की है, और आप देख सकते हैं, कि मेरी एचटीएमएल फाइल का बैकग्राउंड कलर सफलतापूर्वक बदल गया हैं, इसका मतलब हैं, मेरी एचटीएमएल फाइल मेरी सीएसस फाइल से अच्छे से लिंक हो गयी हैं|
सीएसएस कोड जिससे बॉडी का बैकग्राउंड कलर चेंज हो सकेगा
सीएसएस कोडिंग
बॉडी कलर का बदल जाना सीएसएस कोड के सही से अप्लाई होने पर
बॉडी का कलर सीएसएस कोड के बाद

तो दोस्तोंइस तरह हम अपनी एचटीएमएल फाइल को अपनी एक्सटर्नल सीएसस फाइल के साथ लिंक करते हैं|
अभी तक सीएसस के तीन संस्करण दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा चुके हैं, जिसमें वर्तमान में हम CSS 3 का उपयोग कर रहे हैं, सीएसस थ्री पहले दोनों सीएसस के संस्करणों कही ज्यादा विकसित, सुधार और नई प्रॉपर्टीज के साथ आया हैं. CSS 3 के टुटोरिअल आपको आगे भी मिलते रहेंगे

तो दोस्तों, इस तरह हमनें इस पोस्ट में जाना What is CSS, (सीएसस क्या हैं), एक Web-Developer  बनने के लिए आपको CSS सीखना क्यों ज़रूरी हैं, वर्तमान में CSS के कौनसे संस्करण का उपयोग किया जा रहा हैं, इसके अलावा How to Link CSS File To Html ( एक एचटीएमएल फाइल को सीएसएस से लिंक कैसे करते हैं )|

आशा करता हूँ आपको ये पोस्ट अच्छी लगी होगी, और आपको कुछ नया ज़रूर सीखने को मिला होगा, आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और साथियों के साथ और अपने सभी सोशल मीडिया एकाउंट्स पर ज़रूर शेयर करें|
आपका ये पोस्ट पढने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद|

HTML क्या हैं? जानें Introduction, History और Versions of Html

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Learn HTML इन Hindiनमस्कार दोस्तों, स्वागत हैं आपका हमारी पहली ब्लॉग पोस्ट में. अगर आप Web Development सीखने की शुरुआत कर रहे हैं, तो ये Html Tutorial आपके काम का हैं. इस आर्टिकल में हम जानेंगे Html के बारे में, जिसमें हम Introduction of Html, (एचटीएमएल का परिचय),  Html Versions, (एचटीएमएल के विभिन्न संस्करण),  History of Html (एचटीएमएल का इतिहास) के बारे में विस्तृत और सरल भाषा में जानेंगे.

Introduction of Html (एचटीएमएल का परिचय)

दोस्तों, एचटीएमएल का पूरा नाम Hyper Text Markup Language  हैं, सबसे पहली और ज़रूरी बात ये हैं कि ये एक मार्कअप लैंग्वेज हैं, प्रोग्रामिंग लैंग्वेज नहीं, एचटीएमएल की मदद से हम वेबपेज का निर्माण करते हैं| एचटीएमएल की मदद से हम अपनी वेबसाइट या वेबपेज का एक ढांचा तैयार करते हैं, और ये सुनिश्चित करते हैं, हमारा वेबपेज कैसा दिखेगा, कहाँ पर इमेज होगी, कहाँ पर पैराग्राफ होगा इत्यादि|

एचटीएमएल का ढांचा हम विभिन्न प्रकार के मार्कअप टैग्स की सहायता से तैयार करते हैं, जिसके बारे में हम अगले पोस्ट में जानेंगे, अभी सीधे या सरल शब्दों में बताना चाहूं तो एचटीएमएल के मदद से हम हमारे वेबपेज का चेहरा तैयार करते हैं, लेकिन चेहरा कितना सुन्दर दिखेगा, मतलब हमारी वेबसाइट कितनी आकर्षक और मनमोहक होगी ये हम सीएसएस की मदद से सुनिश्चित करते हैं, वेबपेज को सुन्दर कैसे बनाना हैं ये हम हमारे CSS Tutorial  में जानेंगे | इसी तरह एचटीएमएल एक जरिया हैं टेक्स्ट, इमेज, और मल्टीमीडिया-कंटेंट ( ऑडियो और विडियो ) को हमारी वेबसाइट पर दिखाने का, एक एचटीएमएल फाइल का एक्सटेंशन .htm या .html होता हैं| लेकिन वर्तमान में सभी .html का ही उपयोग करते हैं|

आइये अब जानने का प्रयास करते हैं “हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज” का वास्तव में क्या अर्थ हैं -

हाइपर टेक्स्ट एक नार्मल टेक्स्ट से अलग हैं, जहाँ पर हम नार्मल टेक्स्ट को सिर्फ कॉपी कर सकते है या पढ़ सकते हैं, वहीँ पर हाइपर टेक्स्ट एक ऐसा टेक्स्ट हैं, जिस पर क्लिक करने से कोई इवेंट एक्सीक्यूट होता हैं, जैसे कि किसी ऐसे टेक्स्ट पर क्लिक करने से हम उसी वेबसाइट के दुसरे वेबपेज पर लैंड कर जाते हैं, या किसी टेक्स्ट पर सिर्फ माउस ले जाने भर से कोई ड्रॉप-डाउन मेनू ओपन हो जाता हैं, सरल शब्दों में कहूँ तो कोई लिंक जो किसी भी साधरण टेक्स्ट से अलग है और जिस पर क्लिक करने से कोई इवेंट हो उसे ही हाइपर टेक्स्ट कहा जाता हैं, आपने देखा होगा आजकल लगभग सभी वेबसाइटस पर ऐसे लिंक्स होते हैं जिस पर क्लिक करने से कभी कोई मेनू ओपन हो जाता हैं, या सोशल मीडिया के शेयरिंग बटन्स सामने आ जाते हैं, ये सभी हाइपर टेक्स्ट कहलाते हैं.

History of Html (एचटीएमएल का इतिहस)

टिम. बर्नर्स. ली का नाम कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में बहुत सम्मान के साथ लिया जाता हैं, यही वो व्यक्ति हैं जिन्होंने एचटीएमएल का आविष्कार किया था, इसके अलावा सबसे पहले वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर भी टिम. बर्नर्स. ली ने ही बनाया था| टिम. बर्नर्स. ली ने World Wide Web Consortium नाम से एक संस्था की स्थापना की, जब World Wide Web Consortium की स्थापना हुई तब इस संस्था में 243 सदस्य थे, जिनमें एप्पल, याहू, और आईबीएम जैसी बड़ी कंपनियों ने इनकी सदस्यता ले रखी थी| और इसी संस्था के अंतर्गत Html Language, CSS और Http Protocol भी बना|

1980 में जब टिम. बर्नर्स. ली CERN में ( European Organization for Nuclear Research ) एक कांट्रेक्टर के रूप में काम किया करते थे, इसी दौरान उन्होंने अपने CERN के साथी शोधकर्ताओ के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेजों का उपयोग और उन्हें शेयर करने के लिए ENQUIRE नाम के सॉफ्टवेर का निर्माण किया, जो कि एक साधारण हाइपरटेक्स्ट प्रोग्राम था|

World Wide Web Consortium की स्थापना का मुख्य कारण

World Wide Web Consortium की स्थापना के पीछे मुख्य कारण ये था कि पहले के समय में जो वेबसाइटस बन रही थी, वो सभी ऑपरेटिंग सिस्टम या सभी वेब ब्राउज़र पर ठीक से चल नहीं पा रही थी, या बिलकुल भी सपोर्ट नही कर रही थी, जिस कारण से हर ऑपरेटिंग सिस्टम या हर वेब ब्राउज़र पर वेबसाइटस को बनाने के लिए अलग-अलग कोडिंग करनी पड़ रही थी, जो किसी मुसीबत से कम नही था, अब आप खुद सोचिये अगर आपको हर वेब ब्राउज़र पर अपनी वेबसाइट को रन करने के लिए बार-बार कोड लिखना पड़े, तो कैसा महसूस होगा आपको?

टिम. बर्नर्स. ली का मानना था कि एक वेबसाइट सभी प्रकार के वेब ब्राउज़र पर अच्छे से चलनी चाहिए, और उस वेबसाइट के लिए बार-बार कोड भी ना लिखना पड़े इससे अच्छी बात और क्या होगी, इससे वेबसाइट डेवलपरस का काम पहले से बहुत आसान हो जाएगा, ना उन्हें बार-बार कोड लिखना नहीं पड़ेगा, जिससे समय की बचत और बार-बार की जाने वाली मेहनत से बचा जा सकेगा, इसीलिए उन्होंने और उनकी संस्था World Wide Web Consortium के बाकी सदस्यों ने मिलकर एक स्टैण्डर्ड मानक (रूल) की स्थापना की वेबसाइटस को बनाने के लिए, और उस नियम का पालन आज हम सभी वेबसाइट को बनाने के लिए करते हैं|

ये पढ़ें - एचटीएमएल क्या हैं?
इसे जानें - एचटीएमएल में कितने तरह के वेबपेज होते हैं

Versions of Html (एचटीएमएल के संस्करण)

एचटीएमएल के अभी तक कई संस्करण आ चुके हैं, और समय-समय पर इनमें बदलाव और इन्हें पहले से बेहतर बनाया गया हैं, आइये दोस्तों अब जरा एचटीएमएल की शुरुआत से लेकर अभी तक इसमें क्या परिवर्तन हुए और अभी हम कौनसे और पहले से कितने अलग एचटीएमएल का उपयोग करते हैं, जानते हैं...

पहली बार जिस एचटीएमएल से दुनिया को मिलवाया गया था, उसे SGML ( Standard Generalized Markup Language ) कहा जाता था, लेकिन फिर समय के साथ इसमे कुछ सुधार और परिवर्तन हुए, और आज जिस एचटीएमएल का उपयोग हम वेबपेज और वेबसाइट बनाने के लिए करते हैं उसे XHTML ( Extensible Hypertext Markup Language ) कहा जाता हैं, आज के समय में जितने भी वेबपेजेस को आप देखते हैं, उन्हें XHTML में ही लिखा जाता हैं|

HTML 1.0 – एचटीएमएल के पहले संस्करण के बारे में बात की जाए तो इसे HTML 1.0 नहीं सिर्फ Html ही कहा जाता था, क्योंकि एचटीएमएल के पहले संस्करण को कोई भी संख्या (नंबर) नही दिया गया था, लेकिन फिर भी आसानी से समझने और याद रखने के लिए इसे HTML 1.0 कह सकते हैं| एचटीएमएल के पहले संस्करण को वर्ष 1989 में लाने की कोशिश की गयी थी, लेकिन ये लांच हो सका वर्ष 1991 में, जहाँ पर हम इसकी मदद से सिंपल वेबपेज का निर्माण कर सकते थे|
HTML का पहला संस्करण वर्ष 1991 से वर्ष 1994 तक चला|

HTML 2.0 – एचटीएमएल के पहले संस्करण के बाद IETF ( Internet Engineering Task Force ) ने वर्ष 1995 में एचटीएमएल का नया संस्करण Html 2.0 प्रस्तुत किया| जो वर्ष 1995 से 1996 तक चला| ये पहला एचटीएमएल का कोई संस्करण था जिसे संस्करण संख्या दी गयी थी|

HTML 3.2 – फिर World Wide Web Consortium ने वर्ष 1997 में एचटीएमएल के नए संस्करण 3.2 को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया, जो पहले से काफी बेहतर था| Html 3.2 वर्ष 1997 और Html 4.0 वर्ष 1998 में प्रस्तुत किये गये|

इसके बाद एचटीएमएल के एक और नए संस्करण 4.01 को प्रस्तुत किया गया, लेकिन फिर World Wide Web Consortium ने कहा के अब वे एचटीएमएल के नए संस्करणों की घोषणा ना करके XHTML ( Extensible Hypertext Markup Language ) की और ज्यादा ध्यान केन्द्रित करेंगे, और फिर W3C ने XHTML को वर्ष 2000 से वेब-डेवलपरस को XHTML की मदद से Webpage बनाने को प्रोत्साहित किया|

HTML 5 – इसी तरह W3C वेब स्टैण्डर्डस को और अच्छा और पुख्ता करने के लिए आगे कदम बढाता गया, और October 28, 2014 को उसने Html 5, November 1, 2016 को Html 5.1, और December 14, 2017 Html 5.2 को दुनिया के सामने लांच किया|

आप Html के बारे में विस्तृत जानकारी Html पर क्लिक करके जान सकते हैं|  

दोस्तों, इस तरह हमनें जाना “Html Introduction”, “Html History”, और “Html Versions”  के बारे में|
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